पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि
रांची। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विद्यालयी शिक्षा क्षेत्र में जिलों के प्रदर्शन का आकलन करने वाली जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट अगस्त 2026 की 15वीं संस्करण जारी की गई है।रिपोर्ट में झारखंड के 24 जिलों का विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मानकों के आधार पर तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी सिंहभूम जिला प्रथम स्थान पर रहा है,जबकि लोहरदगा दूसरे,कोडरमा तीसरे, रामगढ़ चौथे और सिमडेगा पांचवें स्थान पर है। झारखंड की राजधानी रांची में शिक्षा व्यवस्था 15वें स्थान पर फिसल गया है।
रिपोर्ट में जिलों की रैंकिंग 70 प्रतिशत हाई प्रायोरिटी इंडिकेटर्स और 30 प्रतिशत एनेबलर्स इंडिकेटर्स के आधार पर की गई है। कुल 23 इंडिकेटर्स एवं सब-इंडिकेटर्स को इसमें शामिल किया गया है।
रैंकिंग के अनुसार पूर्वी सिंहभूम ने 76.38 अंक के साथ पहला स्थान प्राप्त किया। लोहरदगा को 71.92 अंक, कोडरमा को 69.96 अंक, रामगढ़ को 69.14 अंक तथा सिमडेगा को 68.06 अंक प्राप्त हुए। रांची 58.08 अंक के साथ 15वें स्थान पर है।
पूर्वी सिंहभूम, लोहरदगा और कोडरमा जैसे जिलों ने बेहतर शैक्षणिक परिणाम,प्रभावी विद्यालय निगरानी और समयबद्ध रिपोर्टिंग के साथ संतुलित प्रदर्शन किया है।दूसरी ओर अपेक्षाकृत निचली रैंकिंग वाले जिलों के लिए विद्यार्थी उपस्थिति,शैक्षणिक प्रगति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में और सुधार की आवश्यकता बताई गई है।
रिपोर्ट की भूमिका में शिक्षा विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह ने कहा है कि शिक्षा सामाजिक प्रगति और सशक्तीकरण की आधारशिला है।उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट राज्य के 24 जिलों में शिक्षा की गुणवत्ता से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतकों की विश्लेषणात्मक स्थिति प्रस्तुत करती है। इसका उद्देश्य केवल जिलों की रैंकिंग करना नहीं, बल्कि शैक्षणिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में उपलब्धियों, कमियों और सुधार की संभावनाओं को स्पष्ट रूप से सामने लाना है।
सचिव उमा शंकर सिंह ने कहा कि यह रिपोर्ट जिला नेतृत्व को उपलब्धियों एवं कमियों की पहचान करने, डेटा आधारित निर्णय लेने तथा निरंतर सुधार की दिशा में कार्य करने में सहायता करेगी।
सचिव उमा शंकर सिंह ने अधिकारियों से अपील की कि इस रिपोर्ट को केवल समीक्षा अथवा रैंकिंग के दस्तावेज के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे सुधार के लिए एक रणनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल आंकड़ों में सुधार करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि झारखंड का प्रत्येक बच्चा सीखने, आगे बढ़ने और अपनी पूरी क्षमता विकसित करने का अवसर प्राप्त करे।
रिपोर्ट में जिलों के प्रदर्शन के आधार पर नियमित समीक्षा, कमजोर संकेतकों पर विशेष ध्यान तथा बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की कार्यप्रणाली से सीख लेने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। इससे राज्य में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में निरंतर एवं समान सुधार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।