पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि
साहिबगंज।पांच-छह साल की बदहाली,रोज-रोज के हादसे और प्रशासन के खोखले वादों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। जिले के मदनशाही में राष्ट्रीय राजमार्ग- 80 पूरी तरह ठप्प हो गया। ट्रैक्टर पलटने की एक घटना ने चिंगारी का काम किया और सैकड़ों ग्रामीण राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर आए।
प्रदर्शनकारियों ने सड़क के बीचों-बीच जमा कीचड़ और गहरे गड्ढों में लेटकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।महिलाओं और बच्चों ने भी विरोध जताया,ये सड़क नहीं कब्रिस्तान है, 9 करोड़ कहां गए और सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे पूरे इलाके में गूंजते रहे। इस उग्र प्रदर्शन से कई घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग- 80 पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। साहिबगंज से भागलपुर और राजमहल जाने वाले सैकड़ों वाहन घंटों फंसे रहे। एंबुलेंस और स्कूल बसें भी जाम में फंसकर रह गईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मदनशाही से होकर गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग- 80 का करीब तीन किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह तबाह हो चुका है।बरसात में ये सड़क तालाब बन जाती है और गर्मी में धूल का गुबार उड़ता है। हर दिन यहां बाइक सवार गिरते हैं, ट्रैक्टर पलटते हैं और मालवाहक वाहन फंस जाते हैं। पिछले एक साल में ही दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रसव पीड़ा से तड़पती महिलाओं और बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी दिक्कत होती है क्योंकि एंबुलेंस भी इस सड़क पर फंस जाती है।
मदनशाही पंचायत के उप मुखिया मोहम्मद अलाउद्दीन अंसारी ने मौके पर प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि बीते पांच साल से हम यही परेशानी झेल रहे हैं। हमने पूर्व उपायुक्त, विधायक सबको आवेदन दिया। सड़क पर कितनी गाड़ियां गिरीं, कितने लोग चोटिल हुए, कितनी फसल बर्बाद हुई, इसका कोई हिसाब नहीं। 9 करोड़ रुपये की मरम्मत योजना पास हुए,लेकिन काम कछुए की चाल से चल रहा है। हमें सिर्फ आश्वासन की घुट्टी पिलाई जा रही है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और विभाग के अधिकारी एक-आध बार आकर माप-जोख करके चले जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई मशीन नहीं दिखती।
सूचना मिलते ही कई वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब एक घंटे की समझाइश के बाद अधिकारियों ने 15 दिन के अंदर पैचवर्क और पक्की मरम्मत शुरू कराने का आश्वासन दिया, इसके बाद जाकर जाम खुला,लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवाओं ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिन में जेसीबी नहीं चली और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो अगली बार हम राष्ट्रीय राजमार्ग को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर देंगे। तब जिला प्रशासन को ही आकर सड़क बनानी पड़ेगी।
सूत्रों के अनुसार इस सड़क की मरम्मत के लिए लगभग 9 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत है। काम एनएचएआई द्वारा कराया जाना है,लेकिन जमीन अधिग्रहण और फंड रिलीज में देरी के कारण काम अटका हुआ है। फिलहाल मदनशाही की ये तस्वीरें सरकार के विकास के दावों पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं,जहां एक तरफ शहर में हेमन्त सरकार के बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनता सड़क के एक टुकड़े के लिए कीचड़ में लोटने को मजबूर है। अब देखना होगा कि 15 दिन का अल्टीमेटम पूरा होता है या फिर राष्ट्रीय राजमार्ग- 80 पर एक और बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा।