महिला उद्यमिता को बढ़ावा देगा झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम:दीपिका पांडेय सिंह

महिला उद्यमिता को बढ़ावा देगा झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम:दीपिका पांडेय सिंह

31 Jul 2026 |  25

 



पूर्वांचल सूर्य संवाददाता 



रांची। हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने गुरुवार को प्रोजेक्ट भवन में राज्य स्तरीय झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम की आधिकारिक वेबसाइट और ठाकुर गंगटी मंडरो सखी सिल्क हैंडलूम वीवर्स की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया।



इस अवसर पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब तक झारखंड की पहचान मुख्य रूप से खनिज संपदा के लिए होती रही है,लेकिन राज्य की महिलाओं ने अपनी मेहनत,कौशल और आत्मविश्वास के बल पर यह साबित किया है कि वे सफल उद्यमी बनने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन महिलाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।यह कार्यक्रम केवल 150 उद्यमों तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि इसका उद्देश्य पूरे राज्य में महिला उद्यमिता का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। 



दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की योजना आने वाले समय में और अधिक नॉलेज पार्टनर्स को जोड़कर इस पहल का विस्तार करने की है, ताकि जेएसएलपीएस से जुड़े 1.54 लाख से अधिक उद्यमों को चरणबद्ध तरीके से बेहतर बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।



दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि हमारा राज्य अभी केवल 25 वर्ष पुराना है।लंबे समय तक हमने बुनियादी आवश्यकताओं और विकास की चुनौतियों का सामना किया है।अब समय आ गया है कि झारखंड केवल खनिजों के लिए नहीं, बल्कि अपने नवाचार, महिला उद्यमिता और सफल ग्रामीण एंटरप्राइजेज के लिए भी देशभर में पहचाना जाए।उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में दस हजार से अधिक ऐसे उद्यम हैं जो उपलब्ध संसाधनों के साथ उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। इन्हीं महिलाओं के प्रयासों से पलाश और आजीविका जैसे ब्रांड राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार इन सफल मॉडलों को और सशक्त बनाकर राज्य में लाखों महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना चाहती है।



दीपिका पांडेय सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि आईआईएम, कोलकाता इनोवेशन पार्क के तकनीकी सहयोग, जेएसएलपीएस के मजबूत नेटवर्क तथा राज्य सरकार की प्रतिबद्धता से झारखंड महिला-नेतृत्व वाली ग्रामीण उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बनाएगा।



झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी,राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और आईआईएम कोलकाता इनोवेशन पार्क के सहयोग से संचालित यह तीन वर्षीय राज्यव्यापी कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा संचालित सूक्ष्म एवं नैनो उद्यमों को पहचान,प्रशिक्षण,मेंटोरिंग,वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव, ब्रांडिंग और औपचारिक स्वरूप प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 



कार्यक्रम के प्रथम चरण में 150 महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का चयन कर उन्हें तीन वर्षों तक व्यापक इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें व्यवसाय का मूल्यांकन, मेंटोरिंग, क्षमता निर्माण, प्रमाणन, वित्तीय एवं बाजार से जुड़ाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, ब्रांडिंग और व्यवसाय विस्तार जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। 



कार्यक्रम के तहत रांची में एक केंद्रीय हब तथा संभागीय स्तर पर पांच क्षेत्रीय स्पोक स्थापित किए जाएंगे, जिससे पूरे राज्य में उद्यमियों तक अंतिम छोर  तक गुणवत्तापूर्ण सहायता पहुंचाई जा सके।



इस मौके पर विभागीय सचिव मनोज कुमार, जेएसएलपीएस सीईओ अनन्य मित्तल, झारक्राफ्ट एमडी गरिमा सिंह, अटल इनोवेशन मिशन के डायरेक्टर हिमांशु जोशी सहित विभागीय अधिकारी और महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मौजूद रही। 



सखी सिल्क को लेकर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा



हमने सखी सिल्क का वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इसके माध्यम से ठाकुरगंगटी के भगैया सिल्क बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हमारी दीदियों को एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिलेगा। एफपीओ के माध्यम से उनके उत्पाद लिए जाएंगे, उनकी ब्रांडिंग सखी सिल्क के तहत की जाएगी और उन्हें पलाश एवं अदिवा स्टोर्स के माध्यम से भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। यह हमारे लिए लंबे समय से एक सपना था कि झारखंड के सिल्क को उसकी वास्तविक पहचान मिले। अब तक भगैया सिल्क को लोग भागलपुर सिल्क के नाम से जानते थे, जबकि इसके असली बुनकर गोड्डा और दुमका के विभिन्न प्रखंडों में हैं। जीआई टैग मिलने के बाद अब इन बुनकरों और हमारी महिला दीदियों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान और पहचान मिलेगी।मुझे पूरा विश्वास है कि यह पहल न केवल भगैया सिल्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाएगी, बल्कि हमारे बुनकर परिवारों और महिला उद्यमियों की आय बढ़ाने के साथ-साथ झारखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प विरासत को भी नई पहचान दिलाएगी।


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