पूर्वांचल सूर्य संवाददाता,पाकुड़। इन दिनों जिले सहित प्रखंडों के हर चौक चौराहों पर प्रगतिशील पाकुड़ का बैनर या दीवार पर लेखन आपको नजर आ जाएगा,लेकिन धरातल पर अगर देखा जाए तो हकीकत कुछ अलग ही बयां कर रही है। सरकार द्वारा हर पंचायत का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है ताकि पंचायत के लोगों को हर सुविधा मिल सके। सरकार द्वारा आपकी योजना,आपकी सरकार,आपके द्वार कार्यक्रम कई बार चलाया गया,मगर ऐसा प्रतीत होता है कि योजना गई भैंस पानी में।जिले का एक ऐसा पंचायत जिसको झारखंड सरकार द्वारा अवार्ड भी मिला है,लेकिन उस पंचायत का हाल देखने या सुनने के लिए शायद ही कोई पदाधिकारी पहुंचे होंगे।
पाकुड़िया प्रखंड के राजपोखर पंचायत अंतर्गत मटियल घाटी एवं धीरीघुटु गांव
यहां बात कर रहे हैं पाकुड़िया प्रखंड के राजपोखर पंचायत अंतर्गत मटियल घाटी और धीरीघुटू गांव की।मटियल घाटी गांव सुनकर ही लगता है कि इस घाटी में शायद कोई पदाधिकारी पहुंचते होंगे। इस गांव के स्व. विश्वनाथ मुर्मू वर्ष 1977 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के समय महेशपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी रह चुके है और उस गांव का ये हाल है।
अवॉर्ड प्राप्त राजपोखर पंचायत
राजपोखर पंचायत में कई गांव है,लेकिन मटियल घाटी एक ऐसा गांव है,जहां दो टोला है।पहला मांझी टोला यानि प्रधान,दूसरा प्राणिक टोला,लेकिन यहां पर पाठकों के सामने प्राणिक टोला की बात रख रहे हैं।ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद पूर्वांचल सूर्य अखबार की टीम मटियल घाटी के प्राणिक टोला पहुंची।टीम द्वारा पूरे टोले का भ्रमण किया गया।यह टोला लगभग 100 घर और लगभग 600- 700 की आबादी वाला टोला हैषजो राजपोखर पंचायत के अंतर्गत आता है।
सरकारी योजनाएं खस्ताहाल
इस टोले के निवासी चंदन मरांडी,गंगाराम टुडू,बोना टुडू,शांति हेंब्रम,फूलमुनी टुडू,बाले बास्की,महेश टुडू सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से पूरे ग्रामीण तीन-चार किलोमीटर दूर कुआं और झरने का पानी ढोकर लाते है तब जाकर कहीं गले का प्यास बुझता है।आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि हमारी समस्याओं को न देखा और न ही सुना,जबकि इस गांव के स्व विश्वनाथ मुर्मू महेशपुर विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक भी रह चुके हैं।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा सरकारी योजनाएं सिर्फ राजपोखर गांव में ही लागू किया गया। राजपोखर गांव में कई स्थानों पर पानी की टंकी लगी हुई है,सड़क अच्छी है,बहुत सारे गरीब व्यक्तियों को आबुआ आवास,प्रधानमंत्री आवास मिल चुका है,लेकिन मटियल घाटी के प्राणीक टोला में आज तक ना कोई सरकारी बोरिंग हुआ है और न ही कोई पानी के टंकी का निर्माण किया गया है।टोले के अधिकतर मकान मिट्टी के बने हुए है,टोले में सिर्फ दो या तीन ही व्यक्तियों को आबुआ आवास का लाभ मिला है।अगर देखा जाय तो यहां पर कही न कहीं बिचौलिए का कमाल है।
बता दें कि ग्रामीणों ने टोला की समस्याओं को लेकर कई बार प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित आवेदन दिया फिर भी आज तक ग्रामीणों को सुविधा नहीं मिली।आखिर ग्रामीण समस्याओं को लेकर जाए तो जाए कहां।फिर भी राजपोखर पंचायत को झारखंड सरकार द्वारा अच्छा पंचायत घोषित कर अवार्ड भी दिया चुका है। इतनी सारी खामियां रहते हुए भी आखिर अवॉर्ड दिलाने वाले टीम में कौन-कौन से पदाधिकारी सम्मिलित थे जो जांच का विषय बन गया है।