संघ प्रमुख मोहन भागवत के समर्थन में उतरे मौलाना शहाबुद्दीन,कहा- समाज को जोड़ने वाली है संघ प्रमुख की सोच

संघ प्रमुख मोहन भागवत के समर्थन में उतरे मौलाना शहाबुद्दीन,कहा- समाज को जोड़ने वाली है संघ प्रमुख की सोच

29 Aug 2025 |  40

 

बरेली।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉक्टर मोहन भागवत का भाषण और उनका लेख कई दिनों से चर्चा में बना हुआ है।जहां एक तरफ कई मुस्लिम संगठन मोहन भागवत के बयानों की आलोचना कर रहे हैं,तो वहीं दूसरी तरफ ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी भागवत के समर्थन में उतर आए हैं।मौलाना ने कहा कि आरएसएस भारत का सबसे बड़ा संगठन है। देश में किसी भी धर्म के मानने वालों का इतना बड़ा संगठन अभी तक वजूद में नहीं आया है।

 

दरअसल,मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि डॉक्टर मोहन भागवत भारत की महान शख्सियत और विद्वान व्यक्ति हैं,उन्होंने समाज को जोड़ने के लिए विभिन्न मौकों पर ऐसी बातें कहीं हैं,जिनसे देश में सकारात्मक सोच विकसित हुई है।मौलाना ने कहा कि एक बार उन्होंने कहा था कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर मत तलाश करो,यही बात फिर उन्होंने कल दोहराई है।मोहन भागवत ने विज्ञान भवन दिल्ली के सम्मेलन में कहा कि हर जगह शिवलिंग मत तलाश करो।साथ ही उन्होंने सभी लोगों को साथ में लेकर चलने की बात कही है।उन्होंने यह भी कहा कि जब सब लोग मिलकर साथ चलेंगे तो भारत तरक्की करेगा।

 

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि संघ प्रमुख की सकारात्मक सोच देश में बढ़ते हिन्दू-मुस्लिम तनाव को कम करेगी,उनके बयानों और लेखों को सभी समुदाय के लोगों को सकारात्मक सोच के साथ सुनना और पढ़ना चाहिए,मैं समझता हूं कि अब बहुत सारे ऐसे संगठन जो देश में उपद्रव मचाते रहते हैं, उनमें बहुत हद तक कमी आएगी। मौलाना ने कहा कि देश की तरक्की के लिए किसी भी समुदाय से टकराव नुकसानदेह देह होता है,टकराव और नफरत से न खुद कोई तरक्की कर सकता है और न समाज और न देश आगे बढ़ सकता है। तरक्की के लिए सभी समुदाय के लोगों को एक साथ मिलजुल कर चलना होगा।

 

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि बीते दो वर्षों में देखा जा रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक स्थलों जैसे मस्जिद, मदरसा,मकबरों और मजारों को कुछ असमाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया,जिसकी वजह से हालात तनावपूर्ण हो गए।सरकारों को हस्तक्षेप करके मामले को निपटाना पड़ा। मौलाना ने कहा कि संघ प्रमुख के इन प्रयासों के बाद मुसलमानों को उम्मीद जगी है कि अब देश में असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगेगी। सौहार्दपूर्ण वातावरण कायम होगा।

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