राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई दो द्वारा स्वयंसेवकों को जल संरक्षण,प्रबंधन और इसके महत्व पर दी गई विस्तृत जानकारी 

राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई दो द्वारा स्वयंसेवकों को जल संरक्षण,प्रबंधन और इसके महत्व पर दी गई विस्तृत जानकारी 

29 Aug 2025 |  13

 

 

पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,इटखोरी,चतरा।प्रखंड के ख्याति प्राप्त एकमात्र उच्च शिक्षण संस्थान भद्रकाली महाविद्यालय इटखोरी की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई 2 द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर आयोजन के छठे दिन गुरुवार को उपस्थित स्वयंसेवक छात्र छात्राओं को जल संरक्षण और प्रबंधन विषय पर चर्चा की गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर दुलार ठाकुर ने की।

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ललित मोहन चौधरी उपस्थित रहे।पहले सत्र का उद्घाटन झंडोतोलन के साथ किया गया।अध्यक्ष और मुख्य अतिथि   को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

 

मुख्य अतिथि प्रोफेसर ललित मोहन चौधरी ने कहा कि जल संकट वर्तमान समय की एक बड़ी चुनौती है।पृथ्वी पर मीठा जल मात्र 2.5 प्रतिशत है जबकि 97.5 प्रतिशत खारा जल है।दुनिया में 2.7 अरब लोगों को स्वच्छ पेय जल नही मिल पाता है।प्रो.चौधरी ने कहा कि मानव जनित कारक और और जलवायु परिवर्तन के कारण जल संकट बढ़ा है।यदि मनुष्य समय रहते जल के दुरुपयोग को नही रोका तो तीसरा विश्वयुद्ध जल संकट के कारण होगा।

 

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉक्टर दुलार ठाकुर ने उपस्थित छात्र छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सुरक्षित जल की आपूर्ति अर्थव्यवस्था का आधार होता है।इसके अभाव में विभिन्न प्रकार की बीमारियां दूषित जल के प्रयोग के कारण होती है।दुलार ठाकुर ने कहा भारत भूजल का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है,लेकिन बोरिंग और विशेषकर डीप बोरिंग के कारण भूजल स्तर नीचे होता जा रहा है।जल संकट का एकमात्र उपाय जल संरक्षण ही है।

 

प्रोफेसर संदीप कुमार ने विस्तार से जल संकट की समस्या और इसके समाधान पर चर्चा की।छात्र-छात्राओं ने भी जल संरक्षण से संबंधित विचार प्रस्तुत किए।कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस इकाई 1 और 2 के कार्यक्रम प्रभारी डॉक्टर संदीप कुमार और प्रोफेसर बालेश्वर पासवान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 

 

इकाई एक के कार्यक्रम प्रभारी डॉक्टर संदीप कुमार ने भूस्खलन के संदर्भ में छात्र-छात्राओं को विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए बताया कि यह एक भौगोलिक प्रक्रिया है,जो पृथ्वी पर अत्यधिक जलपात के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष रूप से घटित होती है। संदीप कुमार ने कहा कि भूस्खलन एक प्राकृतिक आपदा है,जिसका कारण भी मनुष्य है और कारक भी मनुष्य ही है।भूस्खलन से होने वाले प्रभाव के बारे में जानकारी देते हुए संदीप कुमार ने बताया की कैसे भूस्खलन जैसी प्राकृतिक दुर्घटनाओं से मानव जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।

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