टीवी मुक्त भारत अभियान बना खानापूर्ति,मनिका सीएचसी में बिना डॉक्टर चल रहा था जांच शिविर,प्रखंड प्रमुख ने उठाए सवाल

टीवी मुक्त भारत अभियान बना खानापूर्ति,मनिका सीएचसी में बिना डॉक्टर चल रहा था जांच शिविर,प्रखंड प्रमुख ने उठाए सवाल

10 May 2026 |  16

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि



मनिका।मनिका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा 100 दिवसीय टीवी मुक्त भारत अभियान के तहत विशेष जांच शिविर का आयोजन किया गया।सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य क्षेत्र से क्षय रोग (टीबी) को खत्म करना और लोगों को जागरूक करना था,लेकिन शिविर शुरू होते ही स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।शिविर का निरीक्षण करने पहुंचीं मनिका प्रखंड प्रमुख प्रतिमा देवी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि टीवी जैसी गंभीर बीमारी की जांच विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति में कराई जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि शिविर में केवल ड्रेसर एवं निम्न स्तर के कर्मचारियों के भरोसे मरीजों की जांच की जा रही थी, जबकि टीवी जांच के लिए जिले से उपलब्ध कराए गए उपकरणों की निगरानी के लिए कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था।



प्रखंड प्रमुख प्रतिमा देवी ने कहा कि सरकार द्वारा टीवी मुक्त भारत का सपना दिखाया जा रहा है,लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। प्रतिमा ने कहा कि अगर अस्पतालों में डॉक्टर ही मौजूद नहीं रहेंगे तो मरीजों को बेहतर इलाज और सही जांच कैसे मिलेगी।प्रतिमा ने स्वास्थ्य विभाग पर अभियान को सिर्फ खानापूर्ति के तौर पर चलाने का आरोप लगाया। 



प्रतिमा देवी ने बताया कि मामले की जानकारी लेने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर दिव्य क्षितिज कुजूर से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।इससे अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ सका। 



स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही बदहाल हैं और ऐसे महत्वपूर्ण अभियान में डॉक्टरों की अनुपस्थिति लोगों की चिंता बढ़ा रही है।लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में नियमित डॉक्टरों की तैनाती और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च कर चलाए जा रहे टीवी मुक्त भारत अभियान का लाभ आखिर लोगों तक कैसे पहुंचेगा,जब जमीनी स्तर पर ही व्यवस्था सवालों के घेरे में है।


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