विभावि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन आज

विभावि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन आज

29 Jan 2026 |  22

विभावि में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन आज



कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा करेंगे अध्यक्षता,यूनेस्को के सलाहकार पद्मश्री प्रो. अन्विता अब्बी होंगे मुख्य वक्ता



प्रथम दिन तीन तकनीकी सत्र और तीन विशेष व्याख्यान का होगा आयोजन:डॉ. विनोद रंजन



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,हजारीबाग।विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग और मैसूर केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में 29 से 31 जनवरी को विजन 2047 जनजातीय भाषा संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा‌विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है।संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह का आयोजन दिनांक 29 जनवरी को 11 बजे से विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में किया जाएगा।उद्घाटन समारोह में न‌ई दिल्ली के मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री प्रोफेसर अन्विता अब्बी,संस्थापक निदेशक,मौखिक एवं जनजातीय साहित्य केंद्र ,साहित्य अकादमी की गरिमयी उपस्थिति रहेगी।



 प्रोफेसर अब्बी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से विभूषित भारतीय आदिवासी लोक भाषाओं और देश की विलुप्त होती भाषाओं और बोलियों के विश्लेषण और संयोजन के लिए प्रसिद्ध हैं।उन्होंने हिमालय से लेकर अंडमान निकोबार तक की औसतन 100 भाषाओं पर शोध किया और करवाया है। 



प्रोफेसर अब्बी ने देश के छठें भाषा परिवार यानी ग्रेट अंडमानी भाषा परिवार की खोज की,जो अब लुप्त होने की कगार की स्थिति पर है। नई दिल्ली वाचिक और आदिवासी साहित्य केंद्र,साहित्य अकादमी की वे पहली निदेशक रह चुकी हैं, जिनके निर्देशन में मध्य भारत की अनेक लुप्त भाषाओं का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन हुआ।संप्रति वे यूनेस्को के वर्ल्ड अट्लस ऑफ लैंग्वेज की सलाहकार समिति की सदस्य हैं।



विशिष्ट वक्ता के रूप में प्रख्यात कथाकार और पूर्व निदेशक रणनेंद्र,डॉक्टर रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण संस्थान, रांची उपस्थित रहेंगे।उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा करेंगे।राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिवस में तीन विशेष व्याख्यान और तीन तकनीकी सत्र का आयोजन किया जाना है। 



नरेंद्र कुमार, 



विशेष व्याख्यान सत्र में पूर्व निदेशक नरेंद्र कुमार, 

रांची जनजातीय कल्याण शोध संस्थान के डॉक्टर रामदयाल मुंडा, प्रोफेसर ओम प्रकाश,नॉर्थ ईस्टर्न हिल विश्वविद्यालय, मेघालय और प्रोफेसर रवि कुमार रंजन,नागालैंड विश्वविद्यालय,कोहिमा,नागालैंड अपने व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।



इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में 10 राज्यों के विद्वतजन विषय विशेषज्ञ और शोधार्थी सहभागिता कर रहे हैं। इस संगोष्ठी में संवेदनशील और संकटग्रस्त जनजातीय भाषाओं,जनजातीय भाषाओं की समकालीन चुनौतियां,विजन 2047 और जनजातीय भाषाएं,जनजातीय भाषाओं की दशा और दिशा, जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन,जनजातीय भाषाओं के परिपेक्ष्य में सरकारी नीति और प्रयास,झारखंड की जनजातीय भाषाओं,जनजातीय भाषाओं पर प्रौद्योगिकीय प्रभाव,जनजातीय भाषाओं के दस्तावेजीकरण और डिजिटलाइजेशन की चुनौतियां और संभावनाएं, लोक परंपराओं में निहित संस्कृति और उनका संरक्षण, जनजातीय संस्कृति की समकालीन चुनौतियां, डिजिटल युग में जनजातीय संस्कृति, जनजातीय संस्कृति में वाचिक परंपराओं की भूमिका, देशज ज्ञान परंपरा और जनजातीय संस्कृति की समन्वयता, जनजातीय लोक साहित्य में ज्ञान परंपरा, जनजातीय जीवन दर्शन पर आधुनिकरण के प्रभाव, जनजातीय ज्ञान प्रणाली पर भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रभाव, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जनजातीय ज्ञान में समन्वयता आदि जैसे विशिष्ट विषयों पर आलेख व व्याख्यान प्रस्तुत किए जाएंगे।



आयोजक सचिव मानव विज्ञान विभाग अध्यक्ष डॉक्टर विनोद रंजन ने इस आशय की जानकरी दी।सभी संकायाध्यक्षों,सभी विभागाध्यक्षों,सभी विभागों के शिक्षकों,शोधार्थियों,सभी महाविद्यालय के प्राचार्यों व शिक्षकों, स्ववित्त पोषित विभाग के निदेशकों एवं शिक्षक को उद्घाटन समारोह में सादर आमंत्रित किया गया है। इस संगोष्ठी को सफल बनाने में विश्वविद्यालय परिवार प्रयासरत है।


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