गिरिडीह में जल सहियाओं का महिला दिवस पर अपमान,डीसी की डांट-धमकी से भड़का विवाद

गिरिडीह में जल सहियाओं का महिला दिवस पर अपमान,डीसी की डांट-धमकी से भड़का विवाद

10 Mar 2026 |  5

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि



गिरिडीह। भारतीय जनता पार्टी के नेता धनवार विधायक बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि झारखंड की ग्रामीण जल आपूर्ति व्यवस्था और नल से जल योजना की असली नायिका जल सहिया बहनें हैं।ये महिलाएं जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन,जल गुणवत्ता जांच,स्वच्छता सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने जैसे कठिन कार्यों को पूरी निष्ठा और समर्पण से निभाती हैं,लेकिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के मौके पर जब पूरा देश नारी शक्ति का सम्मान कर रहा था, गिरिडीह समाहरणालय में शांतिपूर्ण धरना दे रही इन बहनों को जिले के उपायुक्त रामनिवास यादव की ओर से कड़ी डांट-फटकार और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।



बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जल सहियाओं ने बकाया मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर समाहरणालय परिसर में धरना दिया था।उनका आरोप है कि कई महीनों से उनका मानदेय रोका हुआ है, जबकि काम वे लगातार कर रही हैं। धरने के दौरान डीसी के पहुंचते ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई।वीडियो फुटेज में दिखता है कि डीसी ने प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर गुस्से में चिल्लाते हुए उन्हें जेल भेजने की धमकी दी और गेट जाम करने पर भड़क गए। इससे समाहरणालय परिसर में हंगामा मचा और धरना शांत कराना पड़ा।कई स्थानीय लोगों और पूर्व पदस्थापना के संदर्भ में डीसी पर महिलाओं के प्रति असंवेदनशील रवैये का आरोप लग रहा है। 



बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि साहिबगंज में उनके पिछले कार्यकाल के दौरान भी ऐसे व्यवहार की शिकायतें सामने आई थीं।कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में आरोप लगाया गया है कि ऐसे अधिकारी अवैध खनन जैसे मामलों से लाभान्वित होकर जनता की मजबूरी का मजाक उड़ा रहे हैं।



जल सहियाओं का कहना है कि वे मात्र 2000-4000 रुपये मासिक मानदेय पर काम करती हैं,लेकिन उनका भुगतान समय पर नहीं होता,जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है।इस घटना पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी नेता और कुछ विधायकों ने डीसी पर कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग की है। एक विधायक ने डीसी को बर्खास्त करने तक की मांग उठाई। 



जल सहिया संघ ने भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए हैं, जिसमें योजना के कार्यों में लूट का दावा किया गया है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की जा रही है कि वे इस मामले का संज्ञान लें, बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करें और अधिकारी से महिलाओं से माफी मंगवाएं। ताकि भविष्य में कोई अफसर महिलाओं के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार करने की हिम्मत न कर सके।ये जल सहिया बहनें ग्रामीण झारखंड की रीढ़ हैं। उनका अपमान न केवल शर्मनाक है, बल्कि महिला सशक्तिकरण के दावों पर भी सवाल उठाता है। सरकार को इनकी मांगों पर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि ये महिलाएं ही 'नल से जल' जैसी योजनाओं को जमीन पर उतार रही हैं।


ट्रेंडिंग