वर्षों से करोड़ों की पानी टंकी बनी शोभा की वस्तु,पत्थलगड़ा में गहराया पेयजल संकट

वर्षों से करोड़ों की पानी टंकी बनी शोभा की वस्तु,पत्थलगड़ा में गहराया पेयजल संकट

01 Mar 2026 |  22

 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,चतरा,पत्थलगड़ा।प्रखंड मुख्यालय स्थित शक्तिपीठ मां दक्षिणेश्वरी (मां भगवती) मंदिर के पास सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित विशाल पानी टंकी पिछले सात से आठ वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ी है। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह महत्वाकांक्षी योजना आज विभागीय लापरवाही का प्रतीक बनकर रह गई है।



स्थानीय लोगों ने बताया कि टंकी निर्माण के समय बड़े-बड़े दावे किए गए थे और उद्घाटन के बाद कुछ समय तक जलापूर्ति भी हुई,लेकिन मोटर खराब होने,पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और नियमित रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था ठप हो गई। करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह जलमीनार अब केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। 

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधि,प्रखंड प्रतिनिधि, सांसद और विधायक तक ने इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की है।



इधर नल-जल योजना के तहत प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में लगाए गए जलमीनारों की स्थिति भी दयनीय बनी हुई है। नोनगांव,सिंघानी,नावाडीह,बरवाडीह और मेराल सहित कई गांवों में लाखों रुपये की लागत से स्थापित पानी टंकियां एक से दो वर्षों से बंद पड़ी हैं। कई स्थानों पर टंकी फट चुकी है, मोटर स्टार्टर खराब है,तो कहीं पानी टंकी तक पहुंच ही नहीं रहा है।परिणामस्वरूप गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट गहराने लगा है।



ग्रामीणों ने बताया कि स्वच्छता विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। विभागीय उदासीनता के कारण करोड़ों रुपये की योजनाएं धरातल पर विफल साबित हो रही है।



स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब गांवों में लगे अधिकांश चापानल (हैंडपंप) भी खराब पड़े हैं।ग्रामीण आपसी चंदा कर मरम्मत कराते हैं,लेकिन तकनीकी जांच और नियमित देखरेख के अभाव में वे भी कुछ ही दिनों में फिर खराब हो जाते हैं। जलस्तर नीचे जाने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे गरीब परिवारों के सामने पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं।



ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र ही बंद पड़ी पानी टंकियों को चालू नहीं किया गया और चापानलों की मरम्मत की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।


ट्रेंडिंग