शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह की शहादत दिवस पर उमड़ा जनसैलाब

शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह की शहादत दिवस पर उमड़ा जनसैलाब

17 Jan 2026 |  19

शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह की शहादत दिवस पर उमड़ा जनसैलाब



महेन्द्र सिंह की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी:दीपांकर भट्टाचार्य 



पूर्वांचल सूर्य प्रतिनिधि,गिरिडीह।जिले के बगोदर में शुक्रवार भाकपा (माले) के कद्दावर नेता पूर्व विधायक,जननायक शहीद कॉमरेड महेन्द्र सिंह का 21वां शहादत दिवस बड़ी ही श्रद्धा,उमंग और संकल्प के साथ मनाया गया।पूरे इलाके में लाल झंडों से सजा बगोदर बाजार,बस स्टैंड और आसपास के क्षेत्रों में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता,समर्थक और लोग उमड़ पड़े।कार्यक्रम में जनसैलाब उमड़ने से पूरा बगोदर एक बार फिर कॉमरेड महेन्द्र सिंह की अमर विरासत और उनके संघर्षों से गूंज उठा।



सबसे पहले कॉमरेड महेन्द्र सिंह के पैतृक गांव खम्भरा में उनके स्मृति स्थल पर माल्यार्पण किया गया।इसके बाद बगोदर में भाकपा माले के कार्यालय पर श्रद्धांजलि सभा हुई मुख्य आयोजन बगोदर बस स्टैंड पर विशाल जन संकल्प सभा के रूप में हुआ,जिसमें भारी संख्या में लोग शामिल हुए।



सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि महेन्द्र सिंह की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।कॉमरेड महेन्द्र सिंह को एक विचारधारा का प्रतीक बताते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि वे जनता के दिलों में हमेशा जिंदा रहेंगे।



सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने अन्याय,सामंतवाद और फासीवादी ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।कॉमरेड महेन्द्र सिंह का जन्म 23 अगस्त 1949 को हुआ था।बगोदर विधानसभा से लगातार तीन बार विधायक चुने गए थे।वे गरीबों,किसानों,मजदूरों और दलितों के सबसे मजबूत आवाज थे। 16 जनवरी 2005 को चुनाव प्रचार के दौरान दुर्गी धबैया गांव में नक्सलियों द्वारा सरेआम गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।मौत के समय भी उन्होंने निर्भीकता से कहा था हां मैं ही महेन्द्र सिंह हूं,उनकी यह वीरता आज भी लोगों को प्रेरित करती है।



बता दें कि शुक्रवार को पूरे बगोदर-खम्भरा क्षेत्र को लाल झंडों से पट दिया गया था।प्रखंड बिरनी, प्रखंड अटका और प्रखंड औंरा आदि में पहले से ही झंडा मार्च और जनजागरण अभियान चला था।जनसैलाब पिछले वर्षों की तरह ही भव्य था, जिसमें महिलाएं,युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए।यह शहादत दिवस न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि लोकतंत्र, जनाधिकार और झारखंड बचाओ के संकल्प का भी मंच बना।


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