पूर्वांचल सूर्य संवाददाता
साहिबगंज।झारखंड में पत्थर खनन और क्रशर उद्योग की किस्मत का फैसला गुरुवार दोपहर को होगा।हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस महेश शरदचंद्र सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ 16 अप्रैल को दिए अंतरिम आदेश पर अंतिम सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में साफ किया था कि वन भूमि की सीमा से पत्थर खनन के लिए न्यूनतम 500 मीटर और स्टोन क्रशर लगाने के लिए 400 मीटर की दूरी अनिवार्य होगी।झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 2015 और 2017 में यह दूरी घटाकर 250 मीटर कर दी थी,जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।यह नियम झारखंड के सभी जिलों पर लागू होगा।
अंतरिम आदेश के बाद से ही पत्थर-क्रशर उद्योग में हड़कंप मचा है।कारोबारियों का कहना है कि अगर फैसला बरकरार रहता है तो सैकड़ों खनन पट्टे और क्रशर लाइसेंस रद्द हो सकते हैं। इससे अरबों का निवेश डूबने,हजारों मजदूरों के बेरोजगार होने और गिट्टी के दाम बढ़ने की आशंका है। इसका सीधा असर कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा।वहीं दूसरी ओर पर्यावरण प्रेमियों ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है।
चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर ने इसे झारखंडवासियों की ऐतिहासिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला वन संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है,इससे जल,वायु और ध्वनि प्रदूषण पर दीर्घकालिक नियंत्रण मिलेगा।
बता दें कि हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को 12 जून तक अपना पक्ष रखने की छूट दी थी।मियाद पूरी होने के बाद गुरुवार को सुनवाई हो रही है।सरकार,खदान व क्रशर कारोबारी से लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं तक की नजरें आज के फैसले पर टिकी हैं। अगर हाईकोर्ट अंतरिम आदेश को बरकरार रखता है तो झारखंड के सैकड़ों स्टोन खदान और क्रशर पर ताला लगना तय माना जा रहा है।