प्रयागराज।संगम नगरी में त्रिवेणी के संगम पर विश्व प्रसिद्ध माघ मेले का शुभारंभ 3 जनवरी से हो चुका है।माघ मेला 44 दिनों तक चलेगा। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ इसका समापन होगा।माघ मेले में जहां लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं,तो वहीं संतों के शिविरों में कठिन साधना के विभिन्न रूप भी देखने को मिल रहे हैं।इन्ही में से एक हैं हठयोगी शंकर पुरी,जो लोक कल्याण के लिए खड़े होकर तपस्या कर रहे हैं।
इससे मन की शांति मिलती है
हठयोगी शंकर पुरी बिना बैठे या लेटे केवल खड़े रहकर अपनी साधना पूरी कर रहे हैं।सोने से लेकर भोजन करने तक की सभी क्रियाएं शंकर पुरी खड़े होकर ही कर रहे हैं।शंकर पुरी शरीर के संतुलन को बनाए रखने के लिए एक झूले या रस्सी का सहारा ले रहे हैं,जिस पर वे केवल हाथ टिकाते हैं।अपनी इस कठिन साधना को लेकर शंकर पुरी ने बताया,मैं पिछले वर्ष भी कुंभ मेले में आया था।मैं मानवता के कल्याण के लिए काम करने वाला एक संत हूं। मुझे इस तरह खड़े रहने से मन की शांति मिलती है।
हर सेक्टर में स्वागत द्वार
बता दें कि माघ मेला शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं।माघ मेले में पहली बार श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए हर सेक्टर में एक-एक स्वागत द्वार बनाए गए हैं।अभी तक स्वागत द्वार सिर्फ अर्धकुंभ या महाकुंभ में बनाए जाते थे।पीले और केसरिया रंग से बनाए गए इस स्वागत द्वार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगी हुई है।