पीटीआर में 11 साल में 11 बाघ और बाघिन को हुई उम्रकैद की सजा,भेजा गया लखनऊ,कानपुर और गोरखपुर चिड़ियाघर

पीटीआर में 11 साल में 11 बाघ और बाघिन को हुई उम्रकैद की सजा,भेजा गया लखनऊ,कानपुर और गोरखपुर चिड़ियाघर

06 Jan 2026 |  45

 



पीलीभीत।उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) विश्व में बाघों के दीदार और पर्यटन के लिए अपनी अलग पहचान बना चुका है।पीटीआर से जुड़ा एक और पहलू है,जो बहुत कम लोगों को पता है।पीटीआर में कुछ बाघ ऐसे हैं,जिन्हें जंगल से रेस्क्यू के बाद दोबारा आजादी नहीं मिल सकी और उन्हें चिड़ियाघरों में उम्रकैद की जिंदगी गुजारनी पड़ी।



पीटीआर के बाघों का मिजाज है अलग



पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघों का मिजाज अन्य टाइगर रिजर्व से कुछ अलग बताया जाता है।कई बाघ ऐसे हैं जो आबादी के नजदीक रहने के बावजूद इंसानों को नुकसान नहीं पहुंचाते,लेकिन कुछ मामलों में जंगल में अनाधिकृत रूप से घुसने वालों पर हमले की घटनाएं भी सामने आईं।ऐसे मामलों में वन विभाग को बाघों को रेस्क्यू कर जंगल से बाहर करना पड़ा।यही कारण है कि बीते 11 सालों में यहां के 11 बाघ-बाघिनों को जंगल से बाहर जू भेजना पड़ा,जिसे वन विभाग की भाषा में उम्रकैद कहा जा रहा है।



कानपुर जू में नाम लेकर पुकारने जाने पर करीब आ जाते हैं शेर और तेंदुए



पीटीआर के आंकड़ों के मुताबिक रिजर्व घोषित होने के बाद साल 2014 से अब तक कुल 26 रेस्क्यू ऑपरेशन किए गए। इन अभियानों में पांच शावकों समेत कुल 23 बाघ-बाघिनों को पकड़ा गया।इसके अलावा छह तेंदुओं को भी पकड़ा गया। रेस्क्यू बाघों में 12 को निगरानी और जांच के बाद दोबारा जंगल में छोड़ दिया गया,लेकिन अन्य 11 बाघ-बाघिन की जंगल में वापसी नहीं हो सकी। ये उम्रकैद काटने विभिन्न चिड़ियाघरों में भेज दिए गए।



कानपुर,गोरखपुर और लखनऊ जू भेजे गए बाघ



पकड़े जाने के बाद 11 बाघ-बाघिनों को लखनऊ,गोरखपुर और कानपुर के चिड़ियाघरों में भेजा गया। ये सभी अब वहां मजबूत जाल और चहारदीवारी के पीछे जीवन बिता रहे हैं। गोरखपुर भेजे गए पीटीआर के चर्चित केसरी बाघ की बीमारी के चलते मौत हो चुकी है। हाल ही में कानपुर भेजा गया एक बाघ इन दिनों वहां के दर्शकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।



कानपुर में लोगों को आकर्षित कर रहा है बघीरा



पीटीआर से कानपुर चिड़ियाघर भेजे गए एक बाघ को बघीरा नाम दिया गया है। बताया जाता है कि बघीरा खुले तौर पर सामने आता है।बघीरा की चाल-ढाल और अदाएं पर्यटकों को खासा प्रभावित करती हैं। चिड़ियाघर में आने वाले पर्यटक सबसे पहले बघीरा को देखने की इच्छा जताते हैं।


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