प्रयागराज।संगम नगरी में त्रिवेणी के संगम पर आध्यात्मिक,धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से ओत-प्रोत माघ मेले की शुरुआत 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के पहले स्नान से होगी। 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान के साथ इसका समापन होगा।हिंदू धर्म में माघ महीने को बहुत पवित्र माना गया है।माघ मेले संगम में स्नान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
कल्पवास की पंरपरा माघ मेले की सबसे बड़ी विशेषता
कल्पवास की परंपरा माघ मेले की सबसे बड़ी विशेषता है।देश के कोने-कोने से कल्पवासी और साधु-संत त्रिवेणी के संगम तट पर पहुंचते हैं। 45 दिनों तक कठिन नियमों के साथ भगवान की भक्ति में लीन रहते हैं।कल्पवासी संयमित जीवन, जप-तप, यज्ञ और दान-पुण्य से आध्यात्मिक साधना करते हैं। माघ महीने में किया गया स्नान और दान बहू फलदायी माना जाता है।
माघ मेला की प्रमुख स्नान तिथियां
माघ महीने का पूरा समय स्नान दान के लिए शुभ माना जाता है,लेकिन माघ मेले में कुछ विशेष तिथियां ऐसी होती हैं, जिनका धार्मिक महत्व अत्यधिक होता है। इस वर्ष माघ मेले में 6 मुख्य स्नान पर्व पड़ेंगे।पहला मुख्य स्नान पौष पूर्णिमा 3 जनवरी,दूसरा मुख्य स्नान मकर संक्रांति 14 जनवरी,तीसरा मुख्य स्नान मौनी अमावस्या 18 जनवरी,चौथा मुख्य स्नान बसंत पंचमी 23 जनवरी,पांचवां मुख्य स्नान माघी पूर्णिमा 1 फरवरी और छठा मुख्य स्नान महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होंगे।इन सभी स्नान पर्वों का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है।
मौनी अमावस्या सबसे बड़ा स्नान पर्व
माघ मेले में मौनी अमावस्या को सबसे बड़ा स्नान पर्व माना जाता है।मौनी अमावस्या को करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु संगम नगरी पहुंचते हैं और त्रिवेणी संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं।मौनी अमावस्या के दिन पूरा मेला क्षेत्र श्रद्धा,भक्ति और सनातन परंपराओं के रंग में रंगा नजर आता है।
इस बार माघ मेला 800 हेक्टेयर में
इस बार माघ मेला लगभग 800 हेक्टेयर में बसाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए मेला क्षेत्र में 17 पुलिस स्टेशन और 42 पुलिस चौकियां बनाई गई हैं। 5000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
आधुनिक तकनीक के साथ आपदा प्रबंधन
माघ मेले की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए 17 फायर स्टेशन बनाए गए हैं।साथ ही एटीएस और एनएसजी कमांडो भी तैनात रहेंगे।पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक एआई आधारित कैमरों के माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी,जिससे हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके।
सीएम योगी माघ मेले की तैयारियों की खुद कर रहे हैं माॅनिटिरिंग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद माघ मेले की तैयारियों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और सुरक्षा,स्वच्छता,यातायात,स्वास्थ्य सेवाओं सहित सभी मूलभूत सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं।
बता दें कि माघ मेला केवल एक मेला नहीं,बल्कि आस्था, साधना और सनातन परंपरा का प्रतीक है।माघ मेला आधुनिक व्यवस्थाओं और तकनीक के साथ एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा। त्रिवेणी के संगम पर बसने वाला यह मेला श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक समरसता का केंद्र बनेगा।पुराणों के अनुसार माघ महीने को देव मास भी कहा गया है। इस दौरान संगम में किया गया स्नान,गंगा जल के समान पुण्यकारी माना जाता है।हिंदू धर्म में स्नान-दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सर्वोत्तम समय माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 4 बजे से 5:30 बजे तक रहता है। इस समय संगम में स्नान करने से स्नान का फल कई गुना बढ़ जाता है।