रायबरेली में गैस संकट से थमी रेल पहिया कारखाने की रफ्तार,3 माह में बने सिर्फ 7300 पहिये

रायबरेली में गैस संकट से थमी रेल पहिया कारखाने की रफ्तार,3 माह में बने सिर्फ 7300 पहिये

06 Jul 2026 |  6

 



रायबरेली।ट्रेनों को पटरी पर दौड़ाने के लिए नए प्रयास और दावे होते हैं,जिन पहियों पर ट्रेनों को दौड़ाया जाना है,उसके निर्माण पर ही संकट के बादल मंडरा रहे हैं।इसका बड़ा कारण ईरान-इजराइल युद्ध के दौरान गैस आपूर्ति की रुकावट को माना जा रहा है।क्योंकि कारखाने को जितनी गैस की जरूरत होती है,उतनी मिल नहीं पाई।इससे तीन महीने में मात्र 7300 पहिए ही बन पाए,जबकि इस वित्तीय वर्ष का लक्ष्य 60000 पहियों का है।



रेल पहिया कारखाना की स्थापना सर साल 80 हजार से एक लाख रेल पहिया बनाने के लिए की गई थी।राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड(आरआईएनएल)के तहत चलने वाले इस कारखाने में पहियों का उत्पादन बेहद धीमा रहा। इस पर अप्रैल 2024 में भारतीय रेलवे ने इसका अधिग्रहण करते हुए पूरा काम रेल पहिया कारखाना को सौंपा था।



आरेडिका (आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना) अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत का नतीजा रहा कि इस कारखाने में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 22562 पहिए बनाकर बाहर भेजे गए थे, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में बढ़कर उत्पादन 33515 पहिए का हो गया था।



वित्तीय वर्ष 2024-25 में कारखाने को 50 हजार एलएचबी (लिंक हाफमैन बुश) रेल पहिया उत्पादन का लक्ष्य दिया गया था,जबकि कारखाना ने 63 हजार से अधिक पहिए बनाकर धमाल मचा दिया। इनमें से 59301 रेल पहिया बाहर भेजे भी गए थे।



रेल पहियों को ढालने और आकार देने के लिए उन्हें उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है,जिसके लिए कारखाने में हीटिंग व फोर्जिंग के लिए तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का प्रयोग किया जाता है।बताते हैं कि 15 मार्च से 15 अप्रैल के बीच गैस सप्लाई पर असर पड़ा। इसी बीच कारखाने की कुछ मशीनों में भी खराबी आ गई। इसके चलते पहिया उत्पादन का लक्ष्य धीमा हो गया। नतीजा रहा कि इस बार 60 हजार रेल पहिया उत्पादन लक्ष्य के सापेक्ष प्रतिमाह 2433 रेलपहिया निर्माण का रह गया है।



कारखाने में रा मटेरियल (कच्चा माल) रेल उत्पादन निगम लिमिटेड विशाखापट्टनम से आता है। इसकी कोई कमी नहीं है। कुछ दिनों के लिए एलपीजी गैस की समस्या थी अब सामान्य हो गयी है। मशीनें बना बिगड़ा करती हैं। वित्तीय वर्ष समाप्त होते होते लक्ष्य पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।अनिल श्रीवास्तव, जनसंपर्क अधिकारी, रेल पहिया कारखाना


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