लखनऊ।भारत और ओमान के बीच लागू हुए नए व्यापार समझौते (CEPA)को देश के निर्यात क्षेत्र के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है।इससे जहां भारतीय उत्पादों को ओमान के बाजार में बिना आयात शुल्क के एंट्री मिलेगी,वहीं उत्तर प्रदेश के निर्यात वाले जिले जैसे भदोही और मुरादाबाद के लिए भी नए मौके खुल सकते हैं।कालीन,ब्रासवेयर,हैंडीक्राफ्ट और एमएसएमई सेक्टर से जुड़े हजारों कारोबारियों को उम्मीद है कि इस समझौते से खाड़ी देशों में उनकी पहुंच बढ़ेगी।निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।यानि जॉब ही जॉब।आखिर इस समझौते से भदोही और मुरादाबाद को कितना फायदा हो सकता है और किन-किन सेक्टरों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा.. आइए डिटेल में समझते हैं.
CEPA से भदोही-मुरादाबाद को होगा बड़ा फायदा
दरअसल, भारत-ओमान Comprehensive Economic Partnership Agreement का सबसे बड़ा असर उन जिलों पर पड़ सकता है,जो पहले से एक्सपोर्ट आधारित हैं।भदोही और मुरादाबाद ऐसे ही दो बड़े क्लस्टर हैं,जिनका नाम खुद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने इस समझौते के संभावित लाभार्थियों में लिया है।
पहले समझें डील में ऐसा क्या है
1 जून 2026 से लागू CEPA के तहत भारत को ओमान के 98 फीसदी से अधिक टैरिफ लाइनों पर तत्काल 100 फीसदी ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल गया है।पहले जिन भारतीय उत्पादों पर 5 फीसदी तक आयात शुल्क लगता था, वे अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे,इसका मतलब है कि भारतीय उत्पाद ओमान में सस्ते पड़ेंगे और वहां के खरीदारों के लिए अधिक आकर्षक बनेंगे। यानि ज्यादा बिक्री के मौके।
कालीन उद्योग को सीधा लाभ
भदोही विश्व के सबसे बड़े हैंडमेड कार्पेट क्लस्टर्स में गिना जाता है।ओमान और खाड़ी देशों में होटल,रिसॉर्ट,लग्जरी हाउसिंग और कॉर्पोरेट स्पेस लगातार बढ़ रहे हैं। CEPA के बाद भदोही के कालीनों पर लगने वाली ड्यूटी खत्म होने से वहां के आयातकों के लिए भारतीय कालीन खरीदना सस्ता होगा,इसका असर ये होगा कि भदोही से कालीन निर्यात बढ़ सकता है,जिससे छोटे बुनकरों को ज्यादा ऑर्डर मिल सकते हैं।साथ ही एक्सपोर्ट हाउस अपना उत्पादन बढ़ा सकते हैं और नई डिज़ाइन और प्रीमियम सेगमेंट की मांग आ सकती है,इसका सबसे ज्यादा फायदा हैंडलूम बुनकर, डाइंग यूनिट, पैकिंग यूनिट, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, एक्सपोर्ट एजेंसियों को होगा।
होटल और इंटीरियर सेक्टर से मांग
ओमान खुद अपनी अर्थव्यवस्था को तेल से आगे बढ़ा रहा है और पर्यटन एवं रियल एस्टेट में निवेश कर रहा है।ऐसे में होटल और रिसॉर्ट प्रोजेक्ट्स में कालीन,फर्निशिंग और सजावटी उत्पादों की मांग बढ़ सकती है।भदोही के लिए यह सिर्फ ओमान का बाजार नहीं होगा, बल्कि ओमान के जरिए पूरे खाड़ी क्षेत्र तक पहुंच का रास्ता बन सकता है।
मुरादाबाद को क्या फायदा होगा
मुरादाबाद को ब्रास सिटी कहा जाता है।ओमान और GCC देशों में होम डेकोर, इस्लामिक आर्ट, लग्जरी इंटीरियर और होटल डेकोरेशन की बड़ी मांग है।ड्यूटी खत्म होने से मुरादाबाद के ब्रास,एल्युमिनियम,स्टील और हैंडक्राफ्ट प्रोडक्ट यूरोपीय और तुर्की प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले सस्ते पड़ सकते हैं,इसका असर ये होगा कि यहां से अब निर्यात ऑर्डर बढ़ सकते हैं। MSME यूनिट्स को बड़ा फायदा होगा, ODOP उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच बढ़ सकती है और नई रोजगार संभावनाएं बन सकती हैं।केवल यही नहीं इंजीनियरिंग और मेटल सेक्टर को भी मौके मिलेंगे। CEPA में इंजीनियरिंग गुड्स और औद्योगिक उपकरणों को भी लाभ मिलने की बात कही गई है।मुरादाबाद के कई मेटल-प्रोसेसिंग और फैब्रिकेशन यूनिट्स अप्रत्यक्ष रूप से सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं।