गजब:बाराबंकी में बीएस‌ए और प्रतापगढ़ में एन‌एम‌ए के पद पर जयप्रकाश करता रहा 17 साल नौकरी, 7 साल की हुई जेल

गजब:बाराबंकी में बीएस‌ए और प्रतापगढ़ में एन‌एम‌ए के पद पर जयप्रकाश करता रहा 17 साल नौकरी, 7 साल की हुई जेल

13 Mar 2026 |  6

 



बाराबंकी।उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और प्रतापगढ़ जिले में एक साथ फर्ची दस्तावजों के सहारे सरकारी नौकरी करने वाले जयप्रकाश सिंह का कोर्ट के आदेश पर चौंकाने वाला मामला समाने आया है।सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव के जयप्रकाश सिंह ने कथित तौर पर एक ही शैक्षिक प्रमाणपत्र और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे दो अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी हासिल कर ली थी।



17 साल तक की दो नौकरियां



जांच में पता चला कि जयप्रकाश सिंह की पहली नियुक्ति 26 दिसंबर 1979 को प्रतापगढ़ जिले के स्वास्थ्य विभाग में नॉन-मेडिकल असिस्टेंट के रूप में हुई थी।इसके बाद जून 1993 में जयप्रकाश ने बाराबंकी जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक पद पर भी नौकरी प्राप्त कर ली।हैरान करने वाली बात यह है कि दोनों नियुक्तियों में लगभग एक जैसे दस्तावेजों का उपयोग किया गया और लंबे समय तक दोनों विभागों में कर्मचारी के रूप में दर्ज रहे।



सरकारी नियमों के मुताबिक...



सरकारी नियमों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति एक ही सरकारी नौकरी कर सकता है,लेकिन जयप्रकाश सिंह लगभग 17 सालों तक प्रतापगढ़ और बाराबंकी सरकारी कर्मचारी बने रहे।दोनों विभागों से नियमित रूप से जयप्रकाश को वेतन और अन्य भत्ता मिलता रहा।बड़ा सवाल है कि इतने लंबे समय तक यह मामला अधिकारियों की नजर से कैसे छिपा रहा।



आरटीआई से हुआ मामले का खुलासा



इस मामले की शुरुआत 20 फरवरी 2009 को हुई थी, जब शहर की आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रभात सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।इसके बाद सूचना का अधिकार (आरटीआई) के माध्यम से दोनों विभागों से जानकारी मांगी गई।रिकॉर्ड की जांच में यह सामने आया कि जयप्रकाश सिंह एक ही समय में प्रतापगढ़ के स्वास्थ्य विभाग और बाराबंकी के शिक्षा विभाग में कार्यरत थे और दोनों जगह से वेतन ले रहे थे।जांच के बाद उनके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई।



अदालत ने सुनाई सात साल की सजा



सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट(सीजेएम) सुधा सिंह की अदालत ने आरोपी जयप्रकाश सिंह को दोषी ठहराया। अदालत ने जयप्रकाश को सात साल की कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही सरकारी खजाने से प्राप्त किए गए वेतन की वसूली का भी आदेश दिया गया।अभियोजन अधिकारी अनार सिंह के अनुसार मामले की जांच और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने यह फैसला सुनाया, जिसने सरकारी व्यवस्था में निगरानी की कमी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


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