स्कूली बच्चों को स्वेटर के लिए मिलने वाली राशि न मिलने का सदन में उठा मुद्दा,मंत्री ने इसके लिए केन्द्र को ठहराया दोषी

स्कूली बच्चों को स्वेटर के लिए मिलने वाली राशि न मिलने का सदन में उठा मुद्दा,मंत्री ने इसके लिए केन्द्र को ठहराया दोषी

25 Feb 2026 |  4

 



पूर्वांचल सूर्य संवाददाता,रांची।झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन प्रश्नकाल प्रारंभ हुआ।अल्पसूचित प्रश्न के दौरान उन्होंने सर्वप्रथम देवेन्द्र कुंवर का नाम पुकारा।देवेन्द्र कुंवर ने ठंड बीत जाने के बावजूद भी स्कूली बच्चों को स्वेटर की राशि नहीं मिलने का मुद्दा सदन में उठाया। 



देवेन्द्र कुंवर ने कहा कि राज्य के 15 जिलों में से पांच जिले जिनमें पलामू,हजारीबाग,बोकारो,गढ़वा व चाईबासा महत्वपूर्ण हैं।इन जिलों में स्कूली बच्चों को एक भी पैसे नहीं मिलें,जबकि अन्य दस जिलों में कुछ स्कूली बच्चों को पेमेन्ट हुए और कुछ के नहीं हुए।कुंवर ने कहा कि अकेले राजधानी रांची में 1.80 लाख बच्चों में से 80 हजार बच्चों को स्वेटर की राशि नहीं मिली।कुंवर का कहना था कि क्या सरकार इसकी गंभीरता को देखते हुए आने वाले समय में सर्दी के पूर्व ही स्वेटर की राशि उपलब्ध करायेगी या यूं ही चलता रहेगा। 



मंत्री सुदिव्य कुमार का कहना था कि राज्य में जो ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई हैं।उसके लिए अगर कोई दोषी है तो केन्द्र है। क्योंकि वो अपने अंश की राशि सरकार को समय पर उपलब्ध नहीं करा रही। इसके कारण ऐसा हो रहा है।सुदिव्य कुमार ने कहा कि आपकी पार्टी की केन्द्र में सरकार है,वे क्यों नहीं, अपनी केन्द्र सरकार से कहते है कि राज्य के हक का पैसा उपलब्ध करा दें, ताकि ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न हो। 



भाजपा विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी का भी प्रश्न स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग से संबंधित था,लेकिन वे प्रश्नकाल के दौरान आज भी अनुपस्थित रहे। इसी प्रकार भाजपा विधायक कुशवाहा शशिभूषण मेहता भी प्रश्नकाल के दौरान अनुपस्थित रहे,इनके प्रश्न को डाॅक्टर नीरा यादव ने उठाया। प्रश्न था कि क्या यह बात सही है कि शिक्षा का अधिकार कानून में क्षेत्रीय सीमा, जो पहले 0-1 किलोमीटर की सीमा तक अपेक्षित समूह बच्चे नहीं मिलने पर 1-3 किलोमीटर एवं उसके बाद 3 -6 किलोमीटर तक क्षेत्रीय सीमा किया गया, जिसे सीधा बढ़ाकर छः किलोमीटर कर दिया गया।



क्षेत्रीय सीमा को सीधा छः किलोमीटर तक बढ़ा देने से लॉटरी के माध्यम से नजदीक के बच्चे वंचित रह जाते हैं और दूर के बच्चों का नामांकन हो जाता है। मंत्री का कहना था कि ऐसा नहीं हैं, अगर ऐसा होता है तो सरकार ने शिक्षा का अधिकार दिया है तो सूचना का भी अधिकार दिया है। लोगों को सूचना का अधिकार इस्तेमाल करना चाहिए, जो गलत करेंगे, वे दंडित होंगे।



सरयू राय ने दामोदर नदी में चल रहे प्रदूषण का मामला उठाया। हेमलाल मुर्मू ने बुनियादी शिक्षा की खराब स्थिति से सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया।


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