हिंदुत्व के पिच पर योगी और अखिलेश,राम के सहारे अखिलेश तो बीजेपी को कृष्ण पर भरोसा:धनंजय सिंह 

हिंदुत्व के पिच पर योगी और अखिलेश,राम के सहारे अखिलेश तो बीजेपी को कृष्ण पर भरोसा:धनंजय सिंह 

18 Jul 2026 |  27

 



लखनऊ।उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होगा, लेकिन सियासी तपिश के साथ अभी से चुनावी बिसात हिंदुत्व के एजेंडे पर सेट किए जा रहे हैं।भारतीय जनता पार्टी सत्ता की हैट्रिक लगाने की कवायद में है तो सपा अपनी वापसी का तानाबाना बुन रही है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाकर बीजेपी को घेरने में जुटे हैं तो वहीं इसके जवाब में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित बीजेपी भगवान श्रीकृष्ण के मुद्दे को उठाकर सपा को कठघरे में खड़े करने में जुटी है।



यूपी की सियासी पिच पर सपा पीडीए के साथ राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाकर बीजेपी को हिंदुत्व के मुद्दें को काउंटर जबरदस्त करना चाहती...



उत्तर प्रदेश की सियासी पिच पर समाजवादी पार्टी पीडीए के साथ राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाकर भारतीय जनता पार्टी को हिंदुत्व के मुद्दें को काउंटर जबरदस्त करना चाहती है।सपा के तेवर को देखते हुए बीजेपी ने मथुरा में भगवान कृष्ण का मुद्दा उठा दिया है।लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद से यूपी की सियासत ने जो करवट ली है,उससे सपा के हौसले बुलंद है।बीजेपी के लिए अपने वोटों के समीकरण को दुरुस्त करने की चुनौती खड़ी हो गई है।ऐसे में बीजेपी और सपा एक-दूसरे के गढ़ में सेंध लगाने के लिए इस नए नैरेटिव का सहारा ले रहे हैं।



प्रभु श्रीराम के सहारे अखिलेश



उत्तर प्रदेश की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से समाजवादी पार्टी को राम विरोधी और कारसेवकों पर गोली चलवाने वाली पार्टी के रूप में चित्रित करती रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद सीट पर बीजेपी की हार के बाद अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल ली है।अब अखिलेश प्रभु श्रीराम से दूरी बनाने के बजाय, प्रभु श्रीराम के नाम पर बीजेपी को घेर रहे हैं।



राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को अखिलेश ने उठाया...



राम मंदिर चढ़ावा चोरी मुद्दे को अखिलेश यादव ने उठाया था। इसके बाद से योगी सरकार एक्शन में आ गई है।सपा राम मंदिर चढ़ावा चोरी को अयोध्या से लेकर लखनऊ तक सियासी माहौल बनाए हुए हैं।अखिलेश यादव लगातार आरोप लगा रहे हैं कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी और वहां हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार हुआ है।अखिलेश ने बीते दिनों लखनऊ में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर गौरक्षा से लेकर सनातन के मुद्दे पर चर्चा की और एक्स पर कर लिखा कि समाजवाद ही सनातन है। अखिलेश ने इटावा में भव्य केदारेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवा रहे हैं,इसका उद्घाटन भी सावन में होने जा रहा है।इस तरह अखिलेश खुद को रामभक्त और न्याय का रक्षक दिखाकर सनातनी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहते हैं,ताकि बीजेपी का राम कार्ड कुंद हो सके।



बीजेपी का कृष्ण के सहारे काउंटर प्लान



अखिलेश यादव की इस राम भक्ति और हमलों से रक्षात्मक होने के बजाय बीजेपी बेहद आक्रामक हो गई है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं ने अखिलेश को घेरने के लिए भगवान श्रीकृष्ण और मथुरा का मोर्चा खोल दिया है।पहले सीएम योगी ने सीधे तौर पर अखिलेश को चुनौती दी है कि अगर वे सचमुच सनातनी हैं, तो खुलकर कहें कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराया जाना चाहिए।



सीएम योगी के बाद डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी भगवान श्रीकृष्ण के मुद्दे पर सपा को घेरा



सीएम योगी के बाद डिप्टीसीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी भगवान श्रीकृष्ण के मुद्दे पर सपा को घेरा।केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि अखिलेश यादव आज कल बहुत टिपिर-टिपिर कर रहे हैं,जब हम उनसे (अखिलेश यादव) कहते हैं कि भाई आप चलो अगर आप वास्तव में राम भक्त बनने का दिखावा कर रहे हो तो कृष्ण भक्ति करने का दिखावा नहीं करना है।केशव ने कहा कि अगर मुस्लिम वोटों का लालच आपको नहीं है तो कहो कि भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि को तोड़कर के जो ईदगाह बनी है,उसे हटाओ।इस तरह बीजेपी पूछ रही है कि क्या अखिलेश में इतनी हिम्मत है कि वे मथुरा में कृष्ण मंदिर के निर्माण का खुलकर समर्थन कर सकें।इस तरह से बीजेपी ने सपा का हिंदुत्व के पिच पर सियासी मात देने के लिए भगवान श्रीकृष्ण का सहारा ले रही है।



सपा का सियासी समीकरण बिगाड़ने का प्लान



समाजवादी पार्टी का मुख्य आधार यादव (यदुवंशी) वोटबैंक रहा है,जो खुद को भगवान कृष्ण का वंशज मानता है।बीजेपी श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुद्दे को उठाकर सीधे सपा के इस कोर वोटबैंक में वैचारिक सेंध लगाना चाहती है।बीजेपी का तर्क है कि जो पार्टी कृष्ण की जन्मस्थली के मुद्दे पर मौन है,वह यदुवंशियों की हितैषी कैसे हो सकती है।बीजेपी लगातार अखिलेश को घेर रही है कि जब उनके पिता (मुलायम सिंह यादव) के समय कारसेवकों पर गोलियां चलवान का काम किया था,तब वे रामद्रोही थे और आज राजनीतिक फायदे के लिए अचानक राम के हमदर्द बन रहे हैं।इस तरह से बीजेपी एक तीर से सपा को दो तरह से घायल कर रही है।बीजेपी एक तरफ सपा के राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को कुंद करना चाहती है तो दूसरी तरफ कृष्ण के बहाने सपा के सॉफ्ट हिंदुत्व की हवा निकाल रही है।



2027 की सियासी बिसात पर हिंदुत्व का दांव



उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह बदलाव बेहद गहरा है, 2014 के बाद से यूपी का राजनीति पैटर्न बदल गया है।देश और प्रदेश में अब बहुसंख्यक समाज केंद्रित राजनीति हो गई है और इस फॉर्मूले के जरिए ही बीजेपी लगातार चुनाव जीत रही है।यूपी में सिर्फ मुस्लिम वोटों के सहारे सरकार नहीं बनाई जा सकती है,इसीलिए सपा और कांग्रेस दोनों सनातन की पिच पर उतरकर बीजेपी को मात देने का है।सपा और कांग्रेस यह अच्छी तरह जानती हैं कि अगर उन पर एंटी-हिंदू या तुष्टीकरण का ठप्पा लग गया तो हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण फिर से बीजेपी की तरफ हो जाएगा,इसलिए सपा और कांग्रेस खुद को बीजेपी से बड़ा और सच्चा सनातनी दिखा रही है।सपा कभी धार्मिक मुद्दों से बचती थी,लेकिन अब सपा प्रभु श्रीराम के सहारे बीजेपी को घेर रही है।वहीं बीजेपी राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने के बाद अब अगले कदम के रूप में मथुरा को अपनी राजनीति के केंद्र में ला चुकी है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ यह राम बनाम कृष्ण का खेल आने वाले दिनों में और तीखा होने वाला है।


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