मथुरा।ब्रज की आस्था के प्रमुख केंद्र दानघाटी धाम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रस्तावित गोवर्धन आगमन को लेकर विशेष तैयारियां चल रही हैं।मंदिर परिसर में भक्ति और परंपरा के अनुरूप विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
गिरिराजजी को 56 प्रकार के व्यंजनों से सजी विशेष छबरिया का भोग अर्पित किया जाएगा, जिसे बाद में राष्ट्रपति को भेंट किया जाएगा।
राष्ट्रपति 11 किलो गाय के दूध से पंचामृत अभिषेक करेंगी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 मार्च को मंत्रोच्चारण के साथ गिरिराजजी का 11 किलो शुद्ध गाय के दूध से अभिषेक करेंगी।इसके बाद दूध,दही,बूरा,शहद और गंगाजल से बने पंचामृत से विधिवत पूजा अर्चना होगी।
गोल्फकार्ट में बैठकर गोवर्धन पर्वत की 21 किमी की परिक्रमा करेंगी राष्ट्रपति
गिरिराजजी को सुगंधित इत्र अर्पित कर ग्वाल-वस्त्र समर्पित किए जाएंगे और श्रद्धापूर्वक 56 भोग की छबरिया अर्पित की जाएगी। साथ ही गिरिराजजी की प्रसादी चुनरी ओढ़ाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सम्मान किया जाएगा। इसके उपरांत राष्ट्रपति गोल्फकार्ट में बैठकर गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर की परिक्रमा करेंगी।
प्रसादी चुनरी ओढ़ाकर किया जाएगा सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन को लेकर प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में साफ सफाई,रंगाई पुताई और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का कार्य तेज कर दिया है। ब्रज की आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम माने जाने वाले दानघाटी धाम में विराजमान गिरिराजजी को स्वयं गोवर्धन पर्वत का स्वरूप माना जाता है। इसी गिरिराज की 21 किलोमीटर परिक्रमा करने हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से गोवर्धन पहुंचते हैं और अपनी परिक्रमा का शुभारंभ प्रायः दानघाटी धाम से ही करते हैं।
ये है धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यता के मुताबिक इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों से माखन-दही का दान मांगा था,जिससे यह स्थल दानघाटी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 1957 में स्थापित यह मंदिर आज स्वर्ण कलश, चांदी के द्वार और भव्य सिंहासन से सुसज्जित होकर ब्रज की भक्ति परंपरा का गौरवपूर्ण प्रतीक बन चुका है।