महराजगंज।भारत-नेपाल सीमा से सटे जिलों में डीजल और पेट्रोल का संकट गहराने लगा है।जिले में डीजल और पेट्रोल की कमी से किसानों को परेशानी हो रही है,वहीं सड़क पर वाहन स्वामी भी परेशान है।अधिकतर पेट्रोल पंप ड्राई है,जहां वितरण हो रहा है वहां लंबी लाइन और गाड़ियों की भीड़ भाड़ से व्यवस्था चरमरा सी गई है।इस बीच प्रशासन ने डीजल पेट्रोल वितरण को लेकर कई सख्त फरमान जारी किए है,ऐसे में डीजल-पेट्रोल की तस्करी की भी खबरें सामने आ रही है। जिसको लेकर प्रशासन सख्त है।सख्त आदेश के बाद गैलन में डीजल पांच लीटर और दोपहिया चार पहिया वाहनों के लिए भी लिमिट तय कर दी गयी है।पुलिस की गाड़ी से पेट्रोल पंप पर बार-बार नियमों की घोषणा की जा रही है।
महराजगंज में डीजल-पेट्रोल भरवाने के लिए नया नियम लागू
लागू नियम के तहत गैलन में आधार कार्ड दिखाने पर केवल पांच लीटर डीजल दिया जाएगा।ऐसा इसलिए क्योंकि महराजगंज जिले की सीमा नेपाल से लगभग 55 किलोमीटर साझा करती है।ऐसे में नेपाल में डीजल-पेट्रोल के दामों में लगभग 20 से 25 रुपए का अंतर है।इसको लेकर अधिकतर सीमा पर तस्करी करने की खबरें आती है।प्रशाशन सख्ती बरतते हुए आधार कार्ड के जरिए गैलन और जर्किन में केवल पांच लीटर डीजल देने का आदेश दिया है।
जानें डीएम ने क्या कहा
धान की नर्सरी डालने के लिए सभी किसानों को डीजल की आवश्यकता है,ऐसे में अधिकतर पेट्रोल पंप ड्राई है,जहां डीजल-पेट्रोल का वितरण हो रहा है वहां भी काफी भीड़ है। हालांकि प्रशासन की सख्ती के बाद डीजल की मांग में कुछ हद तक कमी आई है।इसको लेकर डीएम गौरव सिंह सोगरवाल के अलग-अलग तर्क हैं।डीएम ने बताया कि 25 मई से लगभग 50 नहरों में पानी छोड़ा गया है,जिससे किसानों की पंपिंग सेट पर निर्भरता काफी कम हुई है,जबकि तस्करी के मद्देनजर पुलिस एसएसबी को बार्डर पर एक्टिव रहने और गाड़ियों और गैलन में डीजल पेट्रोल देने की मात्रा निर्धारित करने से मांग काफी हद तक कंट्रोल हुई है।
खेती होगी प्रभावित
बता दें कि अभी किसान अपने खेतों में धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे हुए हैं।इसके बाद रोपाई का समय आएगा,ऐसे मे नहरों से सिंचाई की स्थिति केवल 20 फीसदी हो पाती है। बाकी के 80 फीसदी किसान पंपिंग सेट के सहारे हैं।अब अगर समस्या ऐसी ही बनी रही तो किसान की खेती भी प्रभावित हो सकती है।