टाइम बम से मची खलबली:स्लीपर सेल मॉड्यूल या चुनाव में दंगों की तैयारी, IB को इन सवालों के जवाबों की तलाश

टाइम बम से मची खलबली:स्लीपर सेल मॉड्यूल या चुनाव में दंगों की तैयारी, IB को इन सवालों के जवाबों की तलाश

17 Feb 2024 |  44

 

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बोतल बम बनाने वाले जावेद की गिरफ्तारी से सवाल उठ रहा है कि जिले में कोई आतंकी संगठन कहीं स्लीपर सेल माड्यूल्स तो तैयार नहीं कर रहा है।पूरे मामले के पीछे कौन है, महिला के तार किससे जुड़े हैं,जावेद को किसने बम बनाने पर लगाया है और पूरे गिरोह के इरादे क्या थे।

 

ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब आतंकी संगठन चोरी छिपे नव युवकों को बहला फुसला कर अपने लिए काम करने के लिए तैयार करते हैं।नव युवकों को रुपये का लालच दिया जाता था और गिरफ्तार जावेद को भी बम बनाने के लिए रुपये दिए गए थे और कुछ रुपये बाद में दिए जाना तय किया गया था।इससे आशंका बन रही है कि आतंकी संगठन के लिए कोई स्लीपर सेल माड्यूल्स तो तैयार तो नहीं किए जा रहे हैं। एसटीएफ के साथ ही आईबी की टीम ने पहुंच कर जावेद से पूछताछ कर कई सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश की।

 

आईबी और एटीएस टीमों के मुताबिक जो टाइमर बोतल बम बरामद हुए हैं, उनकी मारक क्षमता बेहद खतरनाक है। अगर इनमें एक साथ विस्फोट हो तो भारी नुकासान हो सकता है।जिले में बम पहली बार नहीं बल्कि साल 2000 में भी पकड़े गए थे। सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने 31 मार्च 2000 को गांव जौला से अशफाक और पाकिस्तान के गुजरावाला का रहने वाला वारिस को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि वारिस आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़ा है और इन दोनों के पास से अवैध असलहा और हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ है।

 

18 मई 2017 को एडीजे-7 ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जानसठ क्षेत्र के गांव महलकी का रहने वाला तस्लीम का नाम भी बम बनाने के मामले में सामने आया था। तस्लीम आसाम में बम बनाते हुए घायल भी हुआ था। अब एसटीएफ ने जावेद को बमों के साथ पकड़ा है। खुफिया विभाग ने इस मामले में आतंकी संपर्क खोजने शुरू कर दिए हैं।

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